सदभाव

सदभाव एक नशामुक्ति परामर्ष, उपचार व पुनर्वास केंद्र है। व्यसनमुक्त समाज निर्माण करने हेतु इस केंद्र का संचालन एक पंजीकृत चॅरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता है। ट्रस्ट की स्थापना १९८४ में की गयी, तथा १९८८ मे विधिवत पंजीकरण किया गया। ट्रस्ट की स्थापना मनोविद श्री. अशोक शुक्ल की अध्यक्षता मे कियी गई। उसके साथ सायकियाट्रिस्ट डॉ. प्रकाश नेमाड़े, डॉ. उल्हास कडूस्कर, डॉ. प्रकाश भंगाले, श्री. उत्तमसिंह फुटाने, डॉ. श्री. नरेन्द्र दाभोळकर, उच्च न्यायालयीन सेवा निवृत्त न्यायमूर्ति श्री. चंद्रशेखर धर्माधिकारी, सिविल सर्जन डॉ. एस. के. बनसोडे इत्यादि महानुभवोंने अपना सक्रिय योगदान संस्था के विकास में दिया! उद्द्योगपति श्री. भवरलाल जैन, स्थानिक नेता श्री. सुरेशदादा जैन, अॅडव्होकेट सुनील अत्रे, सांसद स्व. श्री. वाय. एस. महाजन इनका भी योगदान महत्वपूर्ण रहा! संस्था द्वारा संपूर्ण महाराष्ट्र व मध्य्प्रदेश में नशाखोरी के विरोध में जनजागृति का कार्य किया गया।

अ. जलगांव भर्ती प्रवेश प्रक्रिया –
1.प्रतिदिन सुबह 8 बजे से श्याम 8 बजे तक, कोई अवकाश नहीं होता। देर रात भर्ती हेतु फ़ोन के द्वारा पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है।
२. प्रवेश लेते समय रु. १२००० मात्र भोजन, नास्ता इ. खर्चे हेतु एडवांस जमा करना अनिवार्य है। प्रवेश लेने के दो दिन भीतर नशापीड़ित व्यक्ति की मेडिकल व साइकियाट्रिक जांच की जाती है। जिसके आधार पर, मेडिकल बिल बनता है। जो भर्ती होने के एक सप्ताह के भीतर जमा करना अनिवार्य है। प्रवेश हेतु दिए रु. १२००० का भुगतान किसी भी परिस्थिति में लौटाया नहीं जाता। भुगतान समय पर न करनेसे केंद्र के अधिकारी गण पूर्वसूचना के बिना नशापीड़ित का डिस्चार्ज कर सकते है। अतः एवं सभी भुगतान समय सिमा से पहले ही करना अनिवार्य है। डिश्चार्ज भी सुबह १० से श्याम ७ बजे के बिच में ही होंगें। किसी भी कारन से सुबह १० बजे से पूर्व में या श्याम ७ के बाद डिस्चार्ज नहीं होगा।
ब. जबलपुर मध्यप्रदेश भर्ती प्रक्रिया – प्रतिदिन सुबह १० बजे से श्याम ५ बजे तक और राष्ट्रीय तीज त्योहारोपर अवकाश होता है। देर रात भर्ती हेतु फ़ोन के द्वारा पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। प्रवेश लेते समय रु. १५००० मात्र भोजन, नास्ता, इ. ख़र्चे हेतु एडवांस जमा करना अनिवार्य है। प्रवेश लेने के दो दिन के भीतर नशापीड़ित व्यक्ति की मेडिकल व सायकियाट्रिक जाँच की जाती है। जिसके आधार पर मेडिकल बिल बनता है। जो भर्ती होने के एक सप्ताह के भीतर जमा करना अनिवार्य है।
चेतावनी – ०१. जलगांव या जबलपुर में भर्ती हेतु दिए गए पैसोका भुगतान किसी भी परिस्थिति में लौटाया नहीं जाता। भुगतान समय पर न करनेसे केंद्र के अधिकारी गण पूर्वसूचना के बिना नशापीड़ित का डिस्चार्ज कर सकते है। अतः एवं सभी भुगतान समय सिमा से पहले ही करना अनिवार्य है। डिस्चार्ज भी सुबह १० से श्याम ७ बजे के बिच में ही होंगे। किसी भी कारण से सुबह १० बजे से पूर्व में या श्याम ७ के बाद डिस्चार्ज नहीं होगा।
०२. जबलपुर भर्ती हेतु दिए गए रु. १५००० का भुगतान किसी भी परिस्थिति में लौटाया नहीं जाता। भुगतान समय पर न करनेसे केंद्र के अधिकारी गण पूर्वसूचना के बिना नशापीड़ित का डिस्चार्ज कर सकते है। अतः एवं सभी भुगतान समय सिमा से पहले ही करना अनिवार्य है। डिस्चार्ज भी सुबह १० से श्याम ५ बजे के बिच में ही होंगे। किसी भी कारण से सुबह १० बजे से पूर्व में या श्याम ५ के बिच में ही होंगें। किसी भी कारण से सुबह १० बजे से पूर्व में या श्याम ५ के बाद डिस्चार्ज नहीं होंगा। रविवार तथा राष्ट्रीय अवकाश के दिन में जबलपुर केंद्र में डिस्चार्ज नहीं होता है।

संपर्क करने का विवरण – अॅडमिशन के हेतु प्रतिदिन सुबह १० बजे से श्याम ५ बजे तक और राष्ट्रीय तीज त्योहारोंपर अवकाश होता है। देर रात भर्ती हेतु फ़ोन के द्वारा पूर्व अनुमती लेना अनिवार्य है। डिस्चार्ज हेतु सुबह १० के बाद और श्याम ७ से पहले संपर्क करे।
उपचार कार्यक्रम – सुबह ६ बजे प्रातः विधि चाय बिस्किट , ७ बजे पि.टी. -योग -ध्यान-मौन, ९ बजे नाश्ता, मेडिकल चेकअप , प्रार्थना, १० बजे शेअरिंग , ११  बजे ग्रुप लेक्चर, १२ बजे परामर्श , दोपहर – १ बजे भोजन , १. से ३.३०  विश्राम, ४ बजे चाय बिस्किट, ४.३० ते ६ बजेतक पि.टी. – योग, ध्यान, प्राणायम, मौन, ७ बजे मेडिकल चेकअप , ८ बजे भोजन, ९ से १० मनोरंजन कार्यक्रम और विश्रांति।

निरोगी शिक्षा/उपचार के साथ सिखाई जाने वाली बातें – मनोआध्यात्मिक प्रवचन, शेअरिंग, कॉउंसलिंग, पि.टी., योगा, प्राणायाम,ध्यान, मौन, सदभाव परिवार के सूत्र, नशामुक्तिकी व्याख्या, आरोग्य वर्धक आदते, बीमारियो से बचने के उपाय, नींद न आने के कारण और उपचार, मानसिक सुधार, व्यक्तिमत्व विकास इत्यादि।

करिअर – हमारे साथ जुड़कर काम करने की इच्छा हो तो कॄपया अपना बायो डाटा हमारे ईमेल पर या हमारे दिए गए पते पर भेजे, अनुभव होने पर प्राधान्य दिया जायेगा। और जिसे अनुभव न हो ऐसे व्यक्ति को ट्रेनिंग दी जाएगी।

हमारा मिशन = व्यसनमुक्त समाज का निर्माण करना हमारा मिशन व सपना है। इसे प्रत्यक्ष रूप में साकार करने हेतु हम जनजागृति कार्यक्रम, प्रचार प्रसार कार्य, नशामुक्ति उपचार केंद्र, पुनर्वास कार्य इ. के द्वारा वर्ष १९८४ से निरंतर कार्यरत है। प्रतिदिन प्रतिपल हमारा संगठन अपने मिशन को प्राप्त करने हेतु पुर्णतः समर्पित भाव से निरंतर कार्यरत है। हमारे लिए व्यसनमुक्त समाज का निर्माण ही राष्ट्रभक्ति, धर्मपालन, तथा ईश्वर की भक्ति है। यही हमारे लिए मानवधर्म है। हमारा मिशन और सपना साकार करने हेतु हमारा संगठन कई स्तरोंपर निरंतर कार्यरत है।
अ. व्यसनमुक्त भारत अभियान का संचालन – हमारा संगठन सभी लोगोंको संगठित कर, सरकार व प्रशासन पर दबाव लाकर उन्हें संपूर्ण व्यसनमुक्ति हेतु योग्य निर्णय, कानून व सिस्टम निर्माण करने हेतु दबाव बनाने का कार्य कर रहा है। ताकी आगामी १० व वर्षो में सभी नशीली चीजोंका उत्पादन व विक्री हिंदुस्तान में समाप्त हो जाये।
ब. प्रचार प्रसार कार्य – नशीली चीजोंका सेवन करना अपने आप में ही एक मानसिक बीमारी है। इस बीमारी का इलाज भी होता है, एवं उसे नियंत्रण में रखकर हम एक स्वस्थ निरामय जीवन बिता सकते है, यह सन्देश हम आम आदमी व उसके परिवार तक पहुचाने का निरंतर लगातार प्रयास कर रहे है ।

क. नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र का संचालन – हमारा संगठन मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र में अलग अलग स्थानोंपर नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रोंका संचालन सफलता पूर्वक कर रहा है। सदभाव नशामुक्ति केंद्र में आधुनिक विज्ञान पर आधारित मनोआध्यात्मिक चिकित्सा समग्र रूप से की जाती है। नशापीड़ित व्यक्ति का व्यक्तिमत्व तन, मन व चेतना के स्तर पर पूरी तरह से नशाविरोधी बने यह इस ट्रिटमेंट मॉडल का मुख्य उद्देश है। हमारा संगठन प्रतिदिन प्रतिपल अपने मिशन को लेकर समर्पित भाव से संगठित रूप में कार्य करता है। हमारा संगठन नशापीड़ित व्यक्ति तथा उसके परिवार को सभी प्रकार की सहायता परामर्श व मार्गदर्शन प्रदान करता है। हमारा संगठन नशापीड़ित व्यक्ति तथा उसके परिवार को स्वावलंबी, स्वाभिमानी एवं व्यसनमुक्त भारत अभियान में हमारा सहयोगी बनाता है। व्यसनमुक्ति जीवन जीने के लिए नशापीड़ित व्यक्ति तथा उसके परिवार को आजीवन सहायता, परामर्श व मार्गदर्शन देने का कार्य हमारा संगठन निरंतर करता है, हमारा संगठन सभी प्रकार से व्यावसायिक, नैतिक, कानुनी व मानवधर्म के मापदंडो का निरंतर लगातार सदैव पालन करता है। हमारा संगठन नशामुक्ति एवं पुनर्वास ट्रीटमेंट मॉडेल में निरंतर विकास व परिवर्तन हेतु सजग है। नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान व टेक्नोलॉजी का प्रयोग करने हेतु हमारा संगठन प्रतिबद्ध है।

गुणवत्ता पॉलीसी
गुणवत्ता पॉलीसी – हमारा संगठन नशापीडित व्यक्ति व परिवार केंद्रित है। वह हमारे लिए सर्वोतोपरी है। .    . नशापीडित व्यक्ति व उसके परिवार को सर्वोत्तम सेवा देना, ताकि उसकी आवश्यकताऐं व अपेक्षाये पूर्ण हो सके एवं वह पूर्णतः संतुष्ट हो सके। हम नशापीड़ित व्यक्ति व उसके परिवार की समस्यायों को अच्छी तरह से जानकर तथा समझकर नशापीड़ित व्यक्ति तथा उसके परिवार जनोंको बिना भेदभाव के पूर्वाग्रह दृष्टिरहित तरीकेसे सेवावोंको प्रदान करते है। हमारा संगठन पूरी तरह से खुला पारदर्शी व प्रामाणिक है। हमारा संगठन नशापीड़ित व्यक्ति व उसके परिवार हेतु भारतीय स्थानिक सांस्कृतिक पृष्ठभूमी  से तालमेल बिठाकर कार्य करता है। हमारा संगठन नशापीड़ित व्यक्ति तथा उसके परिवार के प्रति सहानुभूति सहायता व आदर का भाव सदैव रखता है। हमारा संगठन पूरी तरह से व्यावसायिक व मानवता वादी दृष्टिकोण अपनाकर कार्य करता है। हमारा संगठन अपने कार्य, अपना मिशन के साथ नशापीडित व्यक्ति व उनके परिवार के हित में समर्पितभाव से कार्य करता है। हमारे संगठन में सामूहिक रूप से परस्पर सहयोग से कार्य करने की पद्धति को आत्मसात किया गया है। हमारा संगठन बहु भाषिक, व अनेकता में एकता का विश्वास रखने वाले संगठन के रूप में कार्य करता है। हमारे लिए व्यसनमुक्त समाज का कार्य एक नैतिक, सामाजिक, धार्मिक, राष्ट्रीय व मानवकल्याण कार्य के रूप में कर्तव्य निष्ठा के साथ करते है।

परिवर्तन व सुधार
परिवर्तन व सुधार – सदभाव नशामुक्ति केंद्र का कार्य डॉ. अशोक शुक्ल के नेतृत्व में १५ अगस्त १९९० में प्रारंभ हुवा था। तबसे लेकर आज तक व भविष्य में भी हमारा संगठन लगातार निरंतर अपने कार्य में सुधार व परिस्थितियोके अनुरूप परिवर्तन लाता रहा है व लाता रहेंगा। संगठन के संस्थापक ड़ॉ. श्री। शुक्ल जिन्हें सर कहा जाता है, हमेशा खुले दिमाग व विशाल ह्रदय के साथ कार्य करते रहे है और वही प्रणाली संगठन ने आत्मसात कर ली है।

 

ट्रीटमेंट मॉडेल  – सदभाव नशामुक्ति केंद्र का ट्रीटमेंट मॉडेल आधुनिक विज्ञान पर आधारित समग्र मनोआध्यात्मिक चिकित्सा है। इस मॉडेल में १९८४ से लेकर आज तक लगातार सुधार किया गया है। हमारा संगठन मानता है की समय व अनुभव के साथ-साथ ज्ञान और विज्ञान का विकास होता है। उसी प्रकार सामूहिक समझदारी व अनुभवोंका प्रयोग भी अपनानां आवश्यक होता है। हमारे संगठन में संस्थापक डॉ. अशोक शुक्ल ने निम्नलिखित बिन्दुओ को प्राथमिकता दि है। 

१. नशीली चीजों  का सेवन करना ही अपने आप में एक मानसिक व व्यक्तिमत्व की बीमारी है। 
२. नशामुक्ति की चिकित्सा समग्र रूप से की जानी चाहिए। 
३. नशापीड़ित व्यक्तियों को सुरक्षा, परिवर्तन व सुधार के लिए आवश्यक मौका व सुविधाएं दी जनि चाहिए। 
४. नशापीडित व्यक्ती के मानसिक शक्तियोंका व सद्गुणोंका विकास करने हेतु उसे प्रेरित किया जाना चाहिए। 
५. नशापीड़ित व्यक्ति के मन में आत्मविश्वास पैदा किया जाना चाहिए की व्यसनमुक्त जीवन ही सभी खुशियोका रास्ता है
६. नशापीड़ित व्यक्तियोंको हीन भावना से न देखते हुए एक बीमार और एक कमजोर व्यक्ती  के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, सदभाव नशामुक्ति केंद्र में प्रारंभ से ही सर्वश्रेष्ठ उपचार पद्धति का समावेश किया गया। विशेषतः हिन्दुस्थान के महापुरुषो द्वारा दी गयी सर्व कालिन शिक्षा का समावेश किया गया है। सदभाव नशामुक्ति केंद्र के उपचार पद्धति में मूलतः नशापीडित व्यक्ति के मानसिक शक्तीयों व सद्गुणोंका विकास करने के आवश्यकता पर बल दिया जाता है। नशापीड़ित व्यक्तियोंको नशामुक्ति का अर्थ भिन्न भिन्न दृष्टिकोण से बताया जाता है, ताकि वह दैनिक जीवन में अपनाने योग्य जीवन पद्धति बन जाएं। सदभाव नशामुक्ति केंद्र में पी.टी., योग, ध्यान, प्रार्थना, प्राणायाम, शेअरिंग कौन्सलिंग, मनोआध्यात्मिक प्रवचन इ. कार्यक्रम होते है। जो अत्यंत लाभदायक है। नशापीडितोंका पूरी तरह से एकांत वास में रखा जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवा, सहयोग, सामूहिक जीवन, इत्यादि सद्गुणों को अपना कर बिना भेदभाव के साथ एक परिवार की भावना से रखा जाता है।

नशामुक्ति प्रक्रिया – 

सेवाऐ – अॅम्बुलन्स सेवा – हमारा संगठन नशापीड़ित व्यक्ती को अपने घर परिवार से लेन में सदैव तत्परता से कार्य करता है। उसके लिए एक टीम गठित की जाती है, जिसमे डॉक्टर, कंपाउंडर, ड्राइवर व सहायक होते है। यह टीम नशापीडित व्यक्ती को सिडेक्टिव इंजेक्शन लगाकर बिना किसी परेशानी के सदभाव पुनर्वास केंद्र में ले आते है, जिसके लिए वास्तविक सेवा शुल्क लिया जाता है।
पत्ता/लोकेशन –
१. जलगांव – सदभाव व्यसनमुक्ति केंद्र, ६६, मयूर कॉलोनी, खंडेराव नगर रोड, पिप्राला, जलगांव – ४२५००२, 
महाराष्ट्र, भारत
दूरभाष क्र.- 0257-2254368, 2250238, 2253812 मोबाइल नं. – +8208445814, 8668908936,  +91 9325731550

वेबसाइट = www.sadbhav.net
ईमेल = sadbhavmitra@gmail.com

२. जबलपुर – सदभाव  नशामुक्ति केंद्र, जेडीए भवन, शांति नगर, दमोह नाका, यूको बँक के सामने, जबलपुर – 
४८२००१, मध्यप्रदेश, भारत। 
दूरभाष क्र. – 0761-6054999, 4071137 मोबाइल नं. – +8208445814, 8668908936, +91 9325731550
वेबसाइट = www.sadbhav.net
ईमेल = sadbhavmitra@gmail.com
व्यसनमुक्ति के सूत्र –
१. रोज सुबह जल्दी उठे।
२. पी.टी., योग, प्राणायाम।
३. भरपेट नास्ता करे।
४. नशाविरोधी दवाइयों का सेवन करे।
५. पूरा दिन अपना काम ईमानदारी के साथ करे। आलस्य, कामचोरी ना करे।
६. सभी कार्य समय पर करे।
७. श्याम को भी पी.टी., योगा, प्राणायाम व ध्यान करे।
८. डॉक्टर द्वारा निर्देशित औषधि सेवन करे।
९. समय पर भोजन करे और समयपर सभी कार्य करे।
१०. व्यसनी लोगों की संगत में या जहां पर नशे की संभावना हो ऐसे कार्यक्रम में ना जाए।
११. नशा करने का विचार मन में आए तो मन को “आज नहीं, अभी नहीं, फिर कभी नहीं” का आदेश दे।
सदभाव परिवार के सूत्र –
१. परिवार में अभद्र शब्द व गांली गलोच का प्रयोग न करे।
२. आत्म रक्षा के अलावा अन्य किसी भी कारण से मारपीट, हिंसा उपद्रव न करे।
३. परिवार में बिना भेदभाव के सबके साथ सहयोग करे। सहयोग से ही हमारा विकास होता है एवं खुशियां मिलती हैं।
४. रोज सुबह घर से बाहर निकलते समय अपने पुरे दिन का प्रोग्राम परिवार को बताना हैं।
५. श्याम को समय पर घर लौटे अगर किसी कारण से देरी हो तो घर में पूर्व सुचना दे।
६. अपने सारे मित्रों की व परिचितों की जानकारी परिवार को देते रहे।
७. परिवार में बूढ़े बच्चे महिलाएं व अपाहिज लोगों का पालन पोषण करे व रक्षा करें।
व्यसनमुक्ति प्रक्रिया –
नशाखोरी एक मानसिक बीमारी तथा आत्मिक कमजोरी है। नशे के कारण शरीर में अनेक दोष और बीमारिया भी उत्पन्न हो जाती है, इसलिए नशामुक्ति प्रक्रिया पाँच चरणों में पूर्ण होती है।
०१. शारीरिक सुधार
०२. मानसिक सुधार 
०३. विविध समस्याओ का समाधान 
०४. चेतना या विवेक जागृति 
०५. फॉलोअप व पुनर्वास
०१.  शारीरिक सुधार – १. शारीरिक सुधार- व्यसनमुक्ति प्रक्रिया में शारीरिक सुधार सबसे पहले आरंभ होता है। शारीरिक सुधार  में (अ) विरह वेदनाओं का नियंत्रण ,(ब) निर्विषीकरण(डिटॉक्सीफिकेशन), (क) कुपोषण दूर करना।, (ड) अन्य छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज व स्वास्थ्यवर्धक आदते डालना इनका समावेश 
होता है।  
(अ) विरह वेदनाओं का नियंत्रण(विथड्रॉल कण्ट्रोल) – जब कोई व्यक्ती नशे का सेवन अचानक बंद करता है, तो उसके शरीर में अनेक प्रकार के उपद्रवी लक्षण दिखाई देते है।  जैसे की हाथों की कपकपी, आँखों और नाक से पानी बहना, सर चकराना, पिंडलियों में दर्द होना, पेट या पुरे बदन में दर्द होना इत्यादि। नशामुक्ति केंद्र में सबसे पहले इन उपद्रवी लक्षणो का ( जिन्हें विथड्रॉल या विरह वेदना कहा जाता है। ) दवाई द्वारा इलाज किया जाता है। जब नशा पीड़ित घरपर नशा छोड़ने की कोशिश करता है, तो विरह वेदनाओं से मुक्ति पाने के लिए, कम से कम एक से दो हप्ते लग जाते है। विरह वेदनाओं के चलते नशा पीड़ित व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है। 
(ब) निर्विषिकरण( डिटॉक्सिफिकेशन) – 
नशीली चीजे मनुष्य के शरीर में धीमे जहर का काम करती है।  नशीली चीजो के सेवन से हमारे लिवर तथा गुर्दो पर घातक दुष्प्रभाव पड़ता है।  लिवर को सूजन आ जाती है।  नशामुक्ति केंद्र में नशीली चीजों के इस जहरीले प्रभाव को औषदियो के प्रयोग से दूर किया जाता है।  निर्विषिकरण की इस प्रक्रिया को कम से कम  एक हप्ते से लेकर दो हप्ते तक समय लग सकता है।
(क) कुपोषण दूर करना –  
नशीली चीजो के प्रभाव में व्यक्ती ठीक भोजन नहीं करता। या बिल्कुल ही अन्न ही ग्रहण नहीं करता। लम्बे समय तक अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो शरीर का कुपोषण हो जाता है। नशामुक्ति केंद्र में कुपोषण का इलाज हैं संतुलित आहार व दवाइयों के प्रयोग से दूर किया जाता है। कुपोषण के कारण रक्ताल्पता और अन्य बिमारियाँ जन्म लेती है। कुपोषण दूर होते ही नशा पीड़ित व्यक्ति का बजन बढ़ जाता है, अन्य दोष भी दूर हो जाते हैं। 
(ड) अन्य बीमारियों का इलाज –  नशामुक्ति केंद्र में व्यक्ति की संपूर्ण शारीरिक जाँच की जाती है। उसके साथ चल रही सभी छोटी मोटी बीमारियों का पता लगाया जाता है, और उनका इलाज आरंभ किया जाता है।  सादा – संतुलित , शाकाहारी भोजन की आदत डाली जाती है।
(इ) स्वास्थवर्धक आदते डालना – 
सदभाव नशामुक्ति केंद्र में स्वछता, स्वयंसेवी, पि.टी., योग , प्रार्थना, मौन व ध्यान के साथ-साथ सुनियोजित व सुनियंत्रित नविन जीवन शैली की आदत डाली जाती है।
स्वास्थवर्धक आदतें –  नशामुक्ति को सफल बनाने के लिए व अपने व्यक्तित्व को नशाविरोधी बनाने की लिए हमें सभी स्वास्थवर्धक आदतों को आत्मसात करना अनिवार्य है।  स्वास्थवर्धक आदते प्रकृति व परमात्मा के द्वारा बनायीं गई है।  इसलिए प्रत्येक मनुष्य को ये आदतें स्वेच्छा से तथा श्रद्धापूर्वक आत्मसात करना चाहिए।  लेकिन स्वास्थवर्धक आदतों के अभाव में मनुष्य को पीड़ा व दुःख भोगना पड़ता है। 
१. शरीर, पर्यावरण तथा निवास को स्वच्छ रखे। 
२. भरपूर परिश्रम व नियमित व्यायाम करे। 
३. सुनियोजित व सुनियंत्रित दिनचर्या अपनाए। 
४. सादा – संतुलित व स्वात्विक भोजन करे। 
५. बिना डॉक्टरोंकी सलाह के औषधि सेवन न करे। 
६. क्रोध, दुःख, चिंता व भय जैसी दुखद भावनाओं पर नियंत्रण प्राप्त करें। 
७. संयमित व विवेकशील यौन आचरण अपनाएं। 
८. बीमारियों के कारणोंका पता लगाकर उनसे दूर रहने के उपाय आचरण में लाए। 
९. सादगी, स्वयंसेवा, सहयोग व सहजीवन को अपनाए। 
बीमारियों से बचने के उपाय – 

(अ) अॅसिडिटी से बचने के उपाय – 
१. किसी प्रकार का नशा न करे। 
२. तामसी भोजन न करें।  नमक तेल, मिर्च-मसालों का  उपयोग अत्यंत कम मात्रा में करे।  नमकीन, तली हुई चीजें, बेकरी के पदार्थ, कोल्ड्रिंक्स, चाट, पदार्थ व फ़ास्ट फ़ूड का सेवन न करे। 
३. जरुरत से ज्यादा न खाये व खाली पेट भी न रहे।  पुरे दिन के भोजन को ३-४ समान हिस्सो में बाँटकर ४ घंटे के अंतराल से ग्रहण करें। 
४. बिना डॉक्टरी सलाह के तथा खाली पेट औषधि सेवन न करे। 
५. मनमानी दिनचर्या को छोड़कर सुनियोजित व सुनियंत्रित दिनचर्या अपनायें। 
६. दिन में न सोये व रात में न जगे। 
७. परिश्रम व नियमित व्यायाम के अभाव में अॅसिडीटी हो सकती है।  इसलिए भरपूर परिश्रम व नियमित व्यायाम करें। 
८. कड़क मीठी चाय न पिये।  चाय के बजाय ठंडा दूध या हल्की चाय लें। 
९. अनियंत्रित चिंता से अक्सर अॅसिडीटी बढ़ती है। इसलिए दुःखद भावनाओं पर नियंत्रण प्राप्त करें। 
१०. अॅसिडीटी के कारणों का पता लगाकर उसे दूर करें, न की औषधियों पर निर्भर रहें। 

(ब) कब्ज, बद्धकोष्ठता या मलावरोध से बचने के उपाय – 
१. पुरे दिन बार-बार भरपूर पानी पियें। 
२. सुबह ब्रश करने के बाद गुनगुना पानी भरपूर पियें। 
३. दैनिक नियमित व्यायाम के बाद पूर्ण पवन मुक्तासन तथा पैसे के पंजो पर खड़े होकर जम्प लगाने का व्यायाम करें। 
४. अॅसिडीटी से बचने के सारें उपाय आचरण में लाये, अगर संभव हो तो सार्बोलिन सिरप के २-२ चमच्च दिन में चार बार लें। 
५. मलावरोध के मूल कारणों का पता लगाकर उसे दूर करें न की दवाइयों पर निर्भर रहें। 

(क) पाईल्स, बवासीर या मूलव्याध से बचने के उपाय –   
१. अॅसिडीटी व कब्ज से बचने के सारे उपाय आचरण में लाये।
२. पाईल्स का मलहम दिन में ३-४ बार रात को सोते समय गुदद्वार पर लगाए। 
३. हरी सब्जियों, फल, रेशेदार व फाइबरयुक्त भोजन ही ग्रहण करे। 
४. बवाशीर के कोम्ब अगर बड़े हो चुके हो तो डॉक्टरी सलाह के अनुसार एक बार ऑपरेशन करा लें। 
५. मलावरोध या कब्ज रोखने के सारे उपाय व स्वास्थवर्धक आदतों को आत्मसात करें।
दस्त, जुलाब या डायरिया से बचने के उपाय – 
१. अॅसिडीटी, कब्ज व बवाशीर से बचने के सरे उपाय आचरण में लाये। 
२. दस्त लगते ही भोजन करना बंद कर दें।
३. बार-बार पानी भरपूर पिये, चाहे तो पानी में चुटकी भर नमक व शक्कर मिला लें। या फिर एलेक्ट्रोलाइड भी इस्तेमाल कर सकते है। 
४. लो-प्रामाइड की गोलियाँ २-२ गोलियाँ दिन में ३-४ बार सेवन करें। 
५. दस्त के बंद होने पर ताजा दही व केले का सेवन करें।
६. जुलाब पूरी तरह से बंद होने पर व जोरों की भूख लगने पर ही दाल-चावल व सादी रोटी जैसा साधारण भोजन ग्रहण करें।
७. अगर जुलाब के साथ पेट में मरोड़ हो या जुलाब के साथ खून गिरता हो तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार औषधोपचार अवश्य लें।
नींद न आने पर उपाय –    
१. निर्धारित समय पर अपने बिस्तर पर चले जाये। 
२. अपने शरीर को शांत, निष्क्रिय व तनाव रहित अवस्था में लेटे।
३. आँखे मूंदकर आँखो पर कपडे की पट्टी हल्के से बांध लें। 
४. शांत, निष्क्रिय व तनाव रहित अवस्था में लेटें रहें, किसी भी कारण से बिस्तर न छोड़े। 
५. मन को शांत, निष्क्रिय व तनाव रहित करने के लिए किसी मन्त्र को या गिनती को मन ही मन में निरंतर लगातार निशब्द होकर दोहराते रहें।  कुछ समय बाद अपने ही आप नींद आ जायेंगी। 
६. नींद के लिए किसी भी परिस्थितीयों में नशा न करें।  या औषधि सेवन न करे। 
७. पि.टी., योगा, प्रार्थना, मौन व ध्यान नियमित रूप से निरंतर लगातार व लंबे समय तक करने से नींद की समस्या समाप्त हो जाती है।

मानसिक सुधार –

नशामुक्ति केंद्र में मानसिक सुधार को अत्याधिक महत्व दिया जाता है।  व्यक्ती के विचारधारा, दॄष्टिकोण और जीवनशैली में दोष होते है, दोषों को, कमियोंको व बुरी आदतों को दूर किये बिना व्यक्ती व्यसनों से दूर नहीं रह सकता। 

मानसिक सुधार की क्रिया एक आतंरिक प्रक्रिया है।  इस प्रक्रिया में नशा पीड़ित व्यक्ति अपने गुण-दोषों का पता लगाता है। उसे अपने गुणों का विकास और दोषों को दूर करने का निश्चित प्रोग्राम बनाने के लिए मदद की जाती है।  मानसिक सुधार की प्रक्रिया चार चरणों में पूर्ण की जाती है।  वे चार चरण इस तरह से है।  
१. आत्म जागृति     २. आत्म परीक्षण 
३. आत्म चिंतन       ४. आत्मपरिवर्तन 

१. आत्म जागृति – 

नशापिडीत व्यक्ति के मन में पश्चाताप के भाव पैदा होते है, और अपने आप को सुधारने की तीव्र इच्छा जागृत होती है।  वही से आत्म जागृती आरंभ होती है। 
आत्म जागृती के अंतर्गत नशापिडीत व्यक्ति के मन में यह भाव पैदा होते है की, नशा करना उसकी सबसे बड़ी भूल थी।  नशा करना न तो बुद्धिमानी है, न बहादुरी और न मर्दानगी है।  नशापीड़ित होने के पीछे व्यक्ति की अपनी मानसिक कमजोरी होती है, न की बाहरी कारण।  आत्म जागृति में नशा पीड़ित व्यक्ति इस बात को समझ लेता है की उसके नशे के पीछे वह स्वयं जिम्मेदार है, न की दूसरे लोग।  व्यसनमुक्ति के लिए उसे अपने आप को बदलना और सुधारना होंगा।  व्यसनमुक्ति उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण और सबसे पवित्र कार्य है।  व्यसनमुक्ति के लिए अब वह कोई शर्त नहीं लगायेगा।  नशे के कारण वह जीवन की खुशियो को छोड़ चूका है, अब उसे इक स्वस्थ, सार्थक और संपन्न जीवन के लिए व्यसनमुक्ति के आलावा कोई रास्ता नहीं है।  वह अब व्यसनमुक्ति की राह  पर ही चलेगा।  व्यसनमुक्ति अब उसके लिए मर्यादित समय के लिए चलने वाली मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं बल्कि एक आजीवन चलनेवाला व्रत है।  आत्म जागृति का अर्थ नशापीड़ित व्यक्ति इस बात को स्वीकार करले की वे नशे के सामने बहुत कमजोर है।  उसे नशा मुक्ति केंद्र व परिवार की सहायता से इस बीमारी से बाहर आना होगा। आत्म जागृति व्यसनमुक्ती का पहला चरण है, जिसके बिना व्यसनमुक्ति प्रक्रिया आरंभ नहीं हो सकती। 

२. आत्म परीक्षण – 

नशामुक्ति केंद्र में नशापीड़ित व्यक्ति अपने भीतर के दोष, कमियाँ और बुरी आदतों को ढूंढता है।  जिस तरह से शारीरिक परीक्षण के द्वारा व्यक्ति की सारी बीमारियों का पता लगाया जाता है, आत्म परीक्षण के द्वारा व्यक्ति के मानसिक दोषों का पता लगाया जाता है। नशापिडीत व्यक्ति को अपने बीते हुए जीवन को और साक्षी भाव से देखने की प्रक्रिया सिखाई जाती है। अपने भूतकाल को साक्षी भाव से देखने से नशापीड़ित व्यक्ति को अपने दोषों, कमियों और बुरी आदतों का पता लगाना आसान हो जाता है। 

(अ) आत्म परीक्षण के लिए मौखिक आत्म कथन व लिखित व स्वाध्याय की मदद ली जाती है। कम से कम तीन और अधिकतम दस नशापीड़ित व्यक्ति समूह में बैठकर अपने अनुभवों का कथन करते है।  आत्म कथन करते समय एक निश्चित विषय को लेकर ही चर्चा होती है।  आत्म कथन करते समय व्यक्ति को बिना लज्जा, बिना संकोच, बिना भय के और तठस्थ भाव से अपना अपना अनुभव व्यक्त करना चाहिए। आत्म कथन से व्यक्ति को अपने दोष, कमियों बुराइयों और कमजोरियों का पता लगाना आसान हो जाता है।  व्यक्ति को अपने ही जैसे अन्य नशापीड़ित व्यक्तियों के अनुभव से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। 

(ब) लिखित स्वाध्याय – 
नशापीड़ित व्यक्ति अपने बीते हुए जीवन की कहानी साक्षी भाव से लिखता है।  इस आत्म कहानी को लिखते समय साक्षी भाव से लिखता है।  इस आत्म कहानी को लिखते समय व्यक्ति को बिना लज्जा, बिना संकोच और बिना भय के अपने दोष, कमजोरियों बुराइयों को और समस्याओँ को लिखना होता है।  इस आत्म कथा से नशा पीड़ित व्यक्ति की पृष्ठभूमि, उसकी विचारधारा, दॄष्टिकोण और जीवन शैली का पता लगता है। 

(क) आत्म कथन व स्वाध्याय के विषय बिंदु  – 
१. पारिवारिक पृष्ठभूमि –      १. आर्थिक                २.शैक्षणिक               ३. सांस्कृतिक  
२. बचपन कैसे बिता? ( ६ से ११ वर्ष का का) 
३. किशोर अवस्था कैसे बीती? ( १२ से १७ वर्ष का काल) 
४. युवा अवस्था कैसे बीती? (१८ से ३५ वर्ष का काल) 
५. प्रौढ़ अवस्था कैसे बीती? ( ३६ से ६० वर्ष का काल) 
६. बुरी आदतों का लेखा-जोखा 
७. नशे का इतिहास 
     (अ) कौन-कौन से नशे कितने समय के लिए किये? 
     (ब) नशे का आरंभ कब कैसे और कौन से कारणों से हुआ? 
     (क) नशा कैसे बढ़ा?
     (ड) नशे से उत्पन्न शारीरिक बीमारियां। 
     (इ) नशे के कारण हुए  एक्सीडेंट या दुर्घटना। 
८. नशे से उत्पन्न पारिवारिक कलह। 
९. नशे के कारण सामाजिक परिहास। 
१०. नशे से आर्थिक हानि। 
११. नशे से अन्य हानियाँ। 
१२. नशा छोड़ने के लिए किये गए उपाय और उनमें मिली असफलता के कारण।
३. आत्म चिंतन – 
आत्म चिंतन का अर्थ नशापिडति व्यक्ति को अपने परिवर्तन और सुधार का निश्चित कार्यक्रम बनाना है। जब व्यक्ति अपने दोष, कमियां, बुरी आदतों और समस्याओं का पता लगा लेता है, तो केवल आश्वासन या वचन देने से व्यसन मुक्ति नहीं होती।  व्यसनमुक्ति के लिए, सुधार व परिवर्तन का निश्चित कार्यक्रम बनाया जाता है।  इसे ही आत्म चिंतन कहतें है। 

आत्म चिंतन के चरण – 

१. शारीरिक सुधार के लिए आवश्यक परिवर्तन – नशापिडीत व्यक्ति को सात्विक और सादा भोजन आवश्यक है।  दवावों का नियमित रूप से सेवन, हल्का व्यायाम और योगा अपनाना आवश्यक होता है। 
२. आर्थिक सुधार – नशा पीड़ित व्यक्ति अपने आर्थिक जीवन का लेखा-जोखा करता है।  और उसमें सुधार लाने का निश्चित कार्यक्रम बनाता है। इस कार्यक्रम में नया काम, धंदा या नौकरी ढूंढना, पुराणी नौकरी या उद्योग व्यवसाय में विकास करना, पुराने कर्जे चुकाना इत्यादि बातों का समावेश होता है। 
३. रिश्तों में सुधार – नशापीड़ित व्यक्ति अपने सभी रिश्तेदारो और मित्रों की लिस्ट बनाकर उनके साथ अपने रिश्तों का लेखा-जोखा करना है। इन रिश्तो में सुधर लाने का निश्चित प्रोग्राम बनाता है ताकि व्यसनमुक्त जीवन बिताने के लिए उसे सभी लोगों का सहयोग मिल सके। 
४. जीवनशैली में सुधार – नशापिडीत व्यक्ति को सुनियंत्रित, सुनियोजित दिनचर्या व सात्विक जीवनशैली अपनाने को सिखाया जाता है।  उसे पि.टी., योगा, प्रार्थना, मौन और ध्यान की शिक्षा दी जाती है।  नशापिडीत व्यक्ति को सादगी से रहना, स्वयं सेवा करना और सबके साथ सहयोग करना सिखाया जाता है।
४. आत्म परिवर्तन – आत्म परिवर्तन का अर्थ बिना शर्त व बिना विलम्ब सुधार या परिवर्तन के कार्यक्रम को आचरण में लाना है। व्यसनमुक्ति का अर्थ वर्तमान काल में सात्विक जीवनशैली को अपनाना होता है।  नशा पीड़ित व्यक्ति को केंद्र में ही नए सिरे से सुधारित जीवन क्रम अपनाने को बाध्य किया जाता है। नशापिडीत व्यक्तियों को सिखाया जाता है की जीवन में जो भी अच्छी बातें है उनको आज इसी वक्त अपनाया जाना चाहिए।  जो बुरी बातें है उनके लिए “आज नहीं, अभी नहीं और कभी नहीं” का फार्मूला अपनाने के लिए कहा जाता है।

विविध समस्याओ का समाधान – 
नशापिडीत व्यक्ति के जीवन में नशा करने के पूर्व में ही कुछ समस्याए होती है व समस्याए नशे के कारण उत्पन्न होती है।  अगर इन समस्याओ का समाधान ढूंडा न जाये तो तनाव बना रहता है।  निराशा के कारण व्यक्ति फिर से नशा करने लगता है। नशापिडीत व्यक्ति के जीवन में शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, पारिवारिक, वैवाहिक या सौच समस्याए सोच की समस्याए होती है।  परामर्श के द्वारा इन समस्याओं का समाधान ढूंढने में सदभाव नशामुक्ति केंद्र पूरी सहायता करता है।

फॉलोअप
नशापीड़ित व्यक्ति को उपचार लेकर घर जाने पर भी लंबे समय तक नशामुक्ति केंद्र में संपर्क बनाए रखना चाहिए।  सदभाव नशामुक्ति केंद्र द्वारा निःशुल्क परामर्श व मेडिकल की सुविधा दी जाती है।  इस सुविधा का लाभ उठाकर नशापीड़ित व्यक्ति को व्यसनमुक्त जीवन बिताना चाहिए।  सदभाव नशामुक्ति केंद्र पत्र, साप्ताहिक पत्रिका भेजकर या फिर, फ़ोन व होम व्हिजिट देकर नशापीड़ित लोगों से संपर्क रखते है।
नशामुक्ति का अर्थ एक भला व जिम्मेदार मनुष्य बनाना है। उसके लिए हमें सभी नशीली चीजो को हमेशा के लिए त्याग कर अपने व्यक्तिमत्व को नशा विरोधी बनाना है। नशामुक्ति के अभ्यासक्रम को जानना, समझना व आचरण में लाना तीनों आवश्यक है।

१. सभी स्वास्थवर्धक आदतें व बीमारियों से बचने के उपाय आत्मसात करना। 
२. आत्म परीक्षण के द्वारा अपने दोष, कमियाँ व बुरी आदतों का पता लगाना।
३. परिवर्तन व सुधार का निश्चित तथा समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर उसे आचरण में लाना। 
४. दुःखद भावनाओं पर नियंत्रण प्राप्त करना। 
५. सदभाव परिवार के सूत्र आत्मसात करना। 
६. नशामुक्ति के सूत्र आत्मसात करना। 
७. सादगी, स्वयंसेवा, सहयोग व सहजीवन इत्यादि सद्गुणों को अपनाकर जीवन में गुणवत्ता लाना। 
८. अपनी समस्याओं का विभाजन कर उनका समाधान प्राप्त करना। 
९. जीवन लक्ष्य निश्चित करना। 
१०. आत्मप्रेरणा व आत्मअनुशासन प्राप्त करना।
नशाखोरी व नशामुक्ति की व्याख्या –

१. नशाखोरी अपने आप में एक मानसिक बीमारी है, जिसके मूल कारण अपने व्यक्तित्व में छिपे होते है। 
२. नशाखोरी एक प्राथमिक, स्थायी, निरंतर बढ़ने वाली व जानलेवा बीमारी है। 
३. नशाखोरी से पीड़ित व्यक्ति का आचरण आत्मघाती, परिवार व समाज विरोधी बन जाता है।  इसलिए समाज नशापीडित व्यक्ति को अपराधी व पापी समझता है।  लोग नशाखोरी को इच्छाशक्ति व नैतिकता का अभाव, जादू होने का दूष्प्रभाव या दुःखद घटनाओं का दुष्परिणाम समझते है। नशापीडित व्यक्ति वास्तविकता को स्वीकार नहीं करता व भ्रमों की दुनिया में जीता है, इस भावदशा को अस्वीकृति या डिनायल कहा जाता है।

नशाखोरी की और ले जाने वाले दोष नशाखोरी से दूर ले जाने वाले गुण
१. अंधानुकरण १. विवेकशील व संयमित आचरण
२. कुसंगति २. सत्संग
३. आलस्य व कामचोरी ३. परिश्रम करना
४. गैर जिम्मेदारी ४. कर्तव्यदक्षता
५. आक्रामक ५. सौम्यता
६. अहंकारी ६. विनम्रता
७. उतावलापन ७. सहनशील, धैर्यवान
८. आडंबर, दिखावा ८. सादगी
९. परावलंबी ९. स्वावलंबी
१०. परसेवा लेने वाला १०. स्वयंसेवा
११. भाग्यवादी ११. कर्मवादी
१२. उपद्रवी १२. सहयोगी
नशामुक्ति की व्याख्या – 

१. नशामुक्ति का अर्थ सभी नशीली चीजो का हमेशा के लिये त्याग करना है, तथा अपने व्यक्तित्व को नशा विरोधी बनाना है। 
२. नशामुक्ति का अर्थ एक भला व जिम्मेदार मनुष्य बनाना है।  भला मनुष्य का अर्थ है, जो अपने दोष, बुराईयों का पता लगाकर उनमे निरंतर सुधार व परिवर्तन लाना है। 
३. जो मनुष्य अपने व्यक्तिशह, पारिवारिक व सामाजिक कर्तव्यों का पालन करता है, उसे जिम्मेदार मनुष्य कहा जाता है। 
४. नशामुक्ति जीवन जीने का ढंग, कला व विज्ञान है। नशामुक्ति एक विचारधारा है, जिसका आधार विज्ञान है।  नशामुक्ति सकारात्मक दृष्टिकोण व सात्विक जीवन शैली का दूसरा नाम है। 
५. नशामुक्ति कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं बल्कि एक पवित्र साधना व अंतहीन व्रत है। नशामुक्ति व्यसनमुक्त जीवन जीने का प्रशिक्षण है।  व्यसनमुक्ति साधना के द्वारा हम एक व्यसनमुक्त, स्वस्थ, व निरामय जीवन जीने की कला एवं विज्ञान सीखतें है, ताकि अपना व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक कल्याण कर सकें।
नशामुक्ति केंद्र की विशेषता –

१. यहाँ केँद्र में शारीरिक सुधार के अलावा मानसिक सुधार व आत्म जागृति होती है। 
२. यहाँ एकांतवास अनिवार्य होता है, समाज, परिवार व दैनिक जीवन से दूर व अलिप्त रहने को एकांतवास कहां जाता है। 
३. यहाँ सादगी अनिवार्य है। सादगी का अर्थ सोच-विचार पूर्वक अपनी आवश्यकता को सिमित करना है। 
४. यहाँ स्वयंसेवा अनिवार्य है।  स्वयंसेवा का अर्थ अपने कार्य खुद करना। 
५. यहाँ सुनियोजित सुनियंत्रित दिनचर्या आवश्यक होता है। 
६ . यहाँ सभी कार्यक्रमों में सहभागी होना अनिवार्य है। 
७. नशामुक्ति एक पवित्र साधना व अंतहीन व्रत है। 
८. नशामुक्ति से व्यक्तिगत पारिवारिक व सामाजिक तीनों स्तरों पर मानव कल्याण होता है। 
९. नशा जीवन विरोधी है, इसलिए वह धर्म, ईश्वर व मानव विरोधी है। नशामुक्ति, धर्म, ईश्वर व मानवता का कार्य है।
अस्पताल की विशेषता –

१. अस्पताल में शारीरिक सुधार व रोग मुक्ति होती है। 
२. अस्पताल में एकांतवास नहीं होता। 
३. अस्पताल में ऐशोआराम की सुविधा उपलब्ध होती है। 
४. अस्पताल में बीमार व्यक्ति की सेवा की जाती है व उसे आराम करना होता है। 
५. अस्पताल में मनमानी दिनचर्या होती है। 
६. अस्पताल में औषधि सेवन व विश्राम के अलावा कोई कार्य नहीं होता। 
७. अस्पताल में ट्रीटमेंट सिमित समय के लिए होती है।
८. रोगमुक्ति से केवल व्यक्तिगत लाभ होता है। 
९. अस्पताल में केवल रोगमुक्ति का कार्य होता है जो केवल व्यक्तिगत कार्य है।

Contact Information
JALGAON – Sadbhav Rehabilitation Center
66, Mayur Colony,Pimprala,
Jalgaon, Maharashtra

Contact Information:
Phone: +91 (0257) 2254368
Mobile: +91 9325731550, 8208445814, 8668908936
Email: sadbhavmitra@gmail.comred.swastik@yahoo.in

Contact Information
JABALPUR – Sadbhav Rehabilitation Center
JDA Building, Shanti Nagar, Damoh Naka, Opp. Uco Bank, Jabalpur,
Madya Pradesh, India 482001

Contact Information:
Phone: +91 (0761) 6054999
Mobile: +91 9325731550, 8208445814, 8668908936
Email: sadbhavmitra@gmail.comred.swastik@yahoo.in

Contact Information
INDORE – Sadbhav Rehabilitation Center
401, AD Regency, Near Bombay Hospital, Service Road
Indore, Madhyapradesh

Contact Information:
Phone: 0731-4088102
Mobile: +91 9325731550, 8208445814, 8668908936
Email: sadbhavmitra@gmail.comred.swastik@yahoo.in

Contact Information
BURHANPUR – Sadbhav Rehabilitation Center
Main Road, Opp. Bajaj Show Room, KHAKNAR,
Dist. Burhanpur, Madya Pradesh, India

Contact Information:
Phone: +91 8208445814
Mobile: +91 9325731550, 8208445814
Email: sadbhavmitra@gmail.comred.swastik@yahoo.in

How to Reach Jalgaon Centre
By Rail

Jalgaon is a junction railway station, on Mumbai-Bhusawal-Nagpur and Mumbai-Bhusawal-Delhi, Surat-Bhusawal railway line. Jalgaon is on at 25 km distance from Bhusawal JN., It is 420 km away from Mumbai, 400 km away from Nagpur, 300 km from Surat, 250 km from Indore via Khandwa JN by rail, it is 300 km away from Pune, It’s 150 km away from Aurangabad away by rail via Manmad JN, and 60 km.


By Road

It is 420 km away from Mumbai, 400 km away from Nagpur, 300 km from Surat, 250 km from Indore by road, it is 300 km away from Pune, It’s 150 km away from Aurangabad away by road, and 60 km away from famous Ajanta Caves by road, and 90 km from Dhuliya by NH-6.


By shared rickshaw

These are available from Jalgaon station, Bus Stand and from any where any time.


By private vehicle

  The driving directions are:
  If you coming from Jalgaon city. Take Pimprala road going towards the Pimprala
  Turn left towards the Hudco at the end of Khanderao Nagar road
  Come only 50 Meter distance forward by Khanderao nagar road, Sadbhav building is on your left.

AND ALSO

  If you coming by Highway from Bhusawal/Aurangabad/Pachora.
  Take National Highway going towards Dhule.
  After crossing the railway bridge, second stop is Gujral Petrol Pump at Right hand side,Turn left towards the Pimprala at the end of Pimprala,
  Take right towards the Hudco road at the end of Khanderao nagar road,Come only 50 Meter forward by Khanderao nagar road, Sadbhav building is on your left.

AND ALSO

  If you coming by Highway from Dhule/Amalner/Chopda.
  Take National Highway going towards Jalgaon.
  After crossing the Khote nagar stop, first stop is Gujral Petrol Pump at Left hand side,
  Turn Right towards the Pimprala at the end of Pimprala,
  Take right towards the Hudco road at the end of Khanderao nagar road,
  Come only 50 Meter forward by Khanderao nagar road, Sadbhav building is on your left.
How to Reach Jabalpur Centre
Sadbhav Rehab Centre, Jabalpur is situated on Main Road going to Katni Near Damoh Naka. It is 4 km. away from Madan Mahal Railway Station and 6 km away from Main Railway Station. Auto Rickshaw, city Bus are available.

How to Reach Inodre Centre
Sadbhav Rahab Centre at Indore is situated Near very famous Bombay Hospital, on Service Road. It is very near to saty sai Chowk on Bombay-Agra Highway. Auto Rickshaw, city bus are available